सब मिलकर करें नारी शक्ति को सशक्त: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
हमारी नारी शक्ति लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है। उसने राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान दिया है। आज देश के हर सेक्टर में नारीशक्ति मिसाल बन रही है।
HighLights
महिला आरक्षण विधेयक लोकतंत्र को अधिक व्यापक बनाएगा।
2029 के चुनावों से आरक्षण लागू करने की आवश्यकता।
पीएम मोदी ने सभी दलों से समर्थन का आग्रह किया।
पीएम नरेंद्र मोदी। 21वीं सदी की विकास यात्रा में भारत एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण की ओर बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में हम अपने लोकतंत्र को और मजबूत करने वाली एक बड़ी पहल के साक्षी बनने वाले हैं। यह अवसर समानता, समावेशन और जनभागीदारी के प्रति हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के नए रूप में सामने आएगा। यह ऐसा समय है, जब संसद को एक ऐसा कदम बढ़ाना है, जो हमारे लोकतंत्र को अधिक व्यापक एवं और अधिक प्रतिनिधिक बनाए। संसद का निर्णय महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई शक्ति देगा और लोकसभा और विधानसभाओं में उनका उचित स्थान सुनिश्चित करेगा। यह क्षण इसलिए भी विशेष है, क्योंकि यह तब आ रहा है, जब देश का वातावरण उत्सव, नवीनता और सकारात्मकता से भरा हुआ है।
आने वाले दिनों में असम में रोंगाली बिहू, ओडिशा में महा बिशुबा पणा संक्रांति, पश्चिम बंगाल में पोइला बैशाख के साथ बंगाली नववर्ष की शुरुआत होगी और केरलम में विषु पूरे उत्साह से मनाया जाएगा। तमिलनाडु के लोग उत्सुकता से पुथांडु की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तो पंजाब और उत्तर भारत में बैसाखी का। मैं कामना करता हूं कि ये दिव्य और पावन पर्व हम सभी के जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आएं। इसी दौरान 11 अप्रैल से महात्मा फुले की 200वीं जयंती के समारोह शुरू होंगे। 14 अप्रैल को हम डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती मनाएंगे। ये दोनों तिथियां हमें सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा के उन मूल्यों की भी याद दिलाती हैं, जिन्होंने आधुनिक होते भारत की दिशा तय की है।
इन्हीं प्रेरणादायी अवसरों के बीच 16 अप्रैल को संसद की ऐतिहासिक बैठक होगी। महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के बाद उसे पारित कराने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है। इसे सिर्फ एक विधायी प्रक्रिया कहना इसके महत्व को कम करके आंकना होगा। यह भारत की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।
हमारी नारी शक्ति लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है। उसने राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान दिया है। आज देश के हर सेक्टर में नारीशक्ति मिसाल बन रही है। साइंस एंड टेक्नोलाजी, उद्यम, सशस्त्र बलों और खेलों के साथ हर क्षेत्र में महिलाएं अपनी सशक्त पहचान बना रही हैं। हमारी माताएं-बहनें और बेटियां देश की प्रगति में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। हमारे पारंपरिक मूल्य बताते हैं कि कोई भी समाज तभी प्रगति करता है, जब माताओं-बहनों को आगे बढ़ने के ज्यादा मौके मिलते हैं। इसी सोच के साथ बीते 11 वर्षों में महिला सशक्तीकरण के लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं।
शिक्षा तक बढ़ती पहुंच, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, वित्तीय समावेशन में बढ़ोतरी और बुनियादी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच ने आर्थिक और सामाजिक जीवन में उनकी भागीदारी को मजबूती दी है, पर इन सारे प्रयासों के बावजूद राजनीति और विधायी संस्थाओं में महिला प्रतिनिधित्व समाज में उनकी भूमिका के अनुरूप नहीं रहा है। इस कमी को अब दूर किया जाना चाहिए, क्योंकि जब महिलाएं प्रशासन चलाने और प्रशासनिक निर्णयों में हिस्सा लेती हैं, तो उनका अनुभव और विजन बहुत काम आता है। इससे चर्चा तो समृद्ध होती ही है, क्वालिटी आफ गवर्नेंस में सुधार भी होता है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल प्रतिनिधित्व का विषय नहीं है, यह हमारे लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील, संतुलित और उत्तरदायी बनाने का प्रयास है।
पिछले कई दशकों में लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं को उचित स्थान दिलाने के लिए बार-बार प्रयास हुए। विधेयकों के मसौदे भी प्रस्तुत किए गए, पर वे पारित नहीं हो सके, फिर भी इस पर व्यापक सहमति रही कि विधायी निकायों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए। सितंबर 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था। यह मेरे जीवन के सबसे विशेष अवसरों में से एक रहा। अब जरूरत है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और साथ ही विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराए जाएं।
महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने का यह अवसर संविधान की मूल भावना के साथ गहराई से जुड़ा है। संविधान निर्माताओं ने एक ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहां समानता न केवल संविधान में निहित हो, बल्कि उसे व्यवहार में भी लाया जाए। विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना इस परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम है। यह एक ऐसे समाज के निर्माण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसमें राष्ट्र का भविष्य तय करने में प्रत्येक नागरिक की समान भूमिका हो। अब इस निर्णय को और टाला नहीं जा सकता। दशकों से इसकी आवश्यकता स्वीकार की गई है। अगर अब भी हम इसे टालते हैं, तो इसका अर्थ होगा कि हम उस असंतुलन को और खींच रहे हैं, जिसे हम पहचानते भी हैं और सुधारने की क्षमता भी रखते हैं।
जब भारत पूरे आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, तब यह जरूरी है कि हमारी संस्थाएं सभी नागरिकों, विशेष रूप से आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली महिलाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करें। इससे दशकों पुराना संकल्प पूरा होने के साथ विकास की गति बनाए रखने में भी बहुत मदद मिलेगी। यह हमारे लोकतंत्र को अधिक उत्तरदायी बनाने और भविष्य के अनुरूप तैयार करने की दिशा में एक अहम कदम होगा। यह समय सामूहिक संकल्प का है। यह किसी एक सरकार, दल या व्यक्ति का नहीं, पूरे राष्ट्र का विषय है। हमें मिलकर इसके महत्व को समझना है। महिला आरक्षण बिल पारित कराने के लिए सहमति बहुत जरूरी है। इसे बड़े राष्ट्रीय हित के रूप में देखा जाना चाहिए। ऐसे अवसर हमें याद दिलाते हैं कि कुछ फैसले अपने समय से बड़े होते हैं। वे भावी पीढ़ियों की दिशा तय करते हैं और हमें बताते हैं कि लोकतंत्र की असली ताकत समय के साथ खुद को और अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी बनाने की क्षमता में होती है।
संसद का ऐतिहासिक सत्र करीब आ चुका है। मैं सभी दलों के सांसदों से नारीशक्ति के लिए इस महत्वपूर्ण कदम का समर्थन करने का आग्रह करता हूं। आइए, हम अपने लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।












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