जागरण संपादकीय: केरलम में देरी
केरलम में मुख्यमंत्री पद के चयन में जितनी अधिक देरी होगी, इस पद के दावेदारों के बीच खींचतान उतनी ही बढ़ेगी।
HighLights
केरलम में मुख्यमंत्री चयन में कांग्रेस को हो रही देरी।
नेतृत्व की दुविधा से पार्टी में गुटबाजी बढ़ने का डर।
केरलम में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे यानी यूडीएफ को स्पष्ट बहुमत मिलने के एक सप्ताह बाद भी मुख्यमंत्री का नाम तय करने को लेकर कोई फैसला न हो पाना पार्टी नेतृत्व की दुविधा और कमजोरी को ही बयान करता है। यदि राज्य में मुख्यमंत्री चयन में और अधिक देरी होती है तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच असमंजस बढ़ने के साथ उनके उत्साह में तो कमी आएगी ही, नेताओं और विशेष रूप से विधायकों के बीच गुटबाजी को भी हवा मिलेगी।
इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि मुख्यमंत्री पद के दावेदारों वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला के समर्थकों के बीच एक तरह का शक्ति प्रदर्शन शुरू हो गया है। ऐसा शक्ति प्रदर्शन कई बार कलह में तब्दील हो जाता है और उसका दुष्प्रभाव पूरी पार्टी पर पड़ता है। यह ध्यान रहे कि हाल के विधानसभा चुनावों में केवल केरलम में ही कांग्रेस अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन कर पाई है।
बंगाल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में उसे निराशा ही हाथ लगी है। यह मानने के अच्छे भले कारण हैं कि केरलम में मुख्यमंत्री के चयन में इसलिए देरी हो रही है, क्योंकि कांग्रेस नेतृत्व और विशेष रूप से राहुल गांधी पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाना चाह रहे हैं।
कोई भी दल हो, मुख्यमंत्री चयन में आलाकमान को अपनी पसंद थोपने के स्थान पर विधायकों की राय को प्राथमिकता देने के साथ समर्थकों के मूड-मिजाज को भांपना चाहिए। जो दल ऐसा करने में असमर्थ रहते हैं, वे राजनीतिक नुकसान ही उठाते हैं। हो सकता है कि केरलम के कुछ विधायक केसी वेणुगोपाल को भी मुख्यमंत्री पद पर आसीन होता देखना चाह रहे हों, लेकिन तथ्य यह है कि वे तो विधानसभा चुनाव ही नहीं लड़े थे।
उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का यह कोई उचित अथवा लोकतांत्रिक आधार नहीं हो सकता कि वे राहुल गांधी के विश्वासपात्र हैं। यदि मुख्यमंत्री चयन में विधायकों और समर्थकों की राय की अनदेखी करने की कोशिश की जाएगी तो फिर सहयोगी दल भी अपनी राय थोपने की चेष्टा करेंगे। केरलम में मुख्यमंत्री चयन में देरी इसलिए अधिक ध्यान खींच रही है, क्योंकि चुनाव वाले अन्य राज्यों और यहां तक कि त्रिशंकु विधानसभा वाले तमिलनाडु में भी मुख्यमंत्री तय हो गया।
केरलम में मुख्यमंत्री पद के चयन में जितनी अधिक देरी होगी, इस पद के दावेदारों के बीच खींचतान उतनी ही बढ़ेगी। यह खींचतान इस निर्देश से थमने वाली नहीं है कि मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के समर्थक किसी तरह की टीका-टिप्पणी अथवा अभद्र व्यवहार न करें। केरलम में मुख्यमंत्री के चयन में जो देरी हो रही है, उससे यह भी नए सिरे से रेखांकित हो रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व समय पर फैसले नहीं ले पाता।












