अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के चलते देश में रसोई गैस के साथ वाहनों में प्रयुक्त होने वाली गैस की किल्लत रोकने के लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू करने का जो फैसला किया, वह यही बताता है कि गैस की कमी होने की आशंका उभर आई है और सरकार ऐसा नहीं होने देना चाहती। इस अधिनियम के लागू होने के बाद देश की तमाम रिफाइनरियों और पेट्रो केमिकल यूनिट्स को अपने अन्य उत्पादों की तुलना में एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता देनी होगी।

इसके अलावा सरकारी तंत्र को इसके प्रति सतर्क रहना होगा कि गैस की न तो जमाखोरी होने पाए और न ही उसकी कालाबाजारी। यह शुभ संकेत नहीं कि देश के कुछ शहरों में रसोई गैस की कालाबाजारी होने की आशंका उभर आई है। इसके अलावा इसका भी खतरा पैदा हो गया है कि मुनाफाखोर रसोई गैस सिलेंडरों की जमाखोरी कर सकते हैं। सरकारी तंत्र को इसके प्रति सतर्क रहना होगा कि गैस की किल्लत को लेकर अफवाहें न फैलने पाएं, क्योंकि जब ऐसा होता है, तब लोग अनावश्यक रूप से चिंतित हो जाते हैं।

इस चिंता के कारण ही कहीं-कहीं गैस सिलेंडरों के लिए लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं। स्पष्ट है कि लोगों को भी धैर्य धारण करना होगा और अफवाहों को लेकर सचेत रहना होगा। यह ध्यान रहे कि चंद दिनों पहले पेट्रोल एवं डीजल की कोई कमी न होने के बाद भी कुछ जगह ऐसी अफवाह फैल गई थी कि उनकी कमी होने जा रही है। इस स्थिति से तभी बचा जा सकता है, जब अफवाहों को फैलने से रोका जाए और संबंधित प्रशासन की ओर से आवश्यक सूचनाएं समय पर प्रसारित की जाती रहें।

आखिर जब संबंधित मंत्रालय और विभागों की ओर से इसके लिए आशवस्त किया जा रहा है कि फिलहाल गैस की कोई कमी नहीं, तब फिर किसी को बिना जरूरत अतिरिक्त गैस सिलेंडर पाने की चेष्टा नहीं करनी चाहिए। यह सही है कि पश्चिम एशिया से तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हो गई है, क्योंकि उनकी आपूर्ति करने वाला होर्मुज जल मार्ग ठप हो गया है, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए कि सरकार रूस, कनाडा के अलावा अफ्रीकी देशों से तेल के साथ गैस की आपूर्ति के हरसंभव जतन कर रही है।

गैस की कमी रोकने के लिए केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकारों को भी सचेत रहना होगा। उचित यह होगा कि जैसे केंद्र सरकार ने जमाखोरी-कालाबाजारी पर निगरानी के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की, वैसी ही समितियां राज्य सरकारें भी गठित करें। इसी के साथ यह भी सुनिश्चित करना आवश्यक है कि न तो घरेलू उपयोग के लिए रसोई गैस सिलेंडर में कमी आने पाए और न ही कमर्शियल सिलेंडर की किल्लत होने पाए, क्योंकि इससे होटल-रेस्त्रां उद्योग प्रभावित होंगे और इसका असर अन्य अनेक लोगों पर भी पड़ेगा।