अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले की ओर ध्यान आकृष्ट करने के लिए गत दिवस संसद परिसर में जो कुछ किया गया, वह केवल विपक्षी दलों की सतही-सस्ती राजनीति का परिचायक ही नहीं, बल्कि संत समाज और साथ ही हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वाला भी है। जो हिंदू समाज चढ़ावा चोरी के मामले से पहले ही आहत है, उसे और उद्वेलित करने वाले ये वही लोग हैं, जिन्होंने राम मंदिर बनने का कभी स्वागत नहीं किया। कुछ ने तो उसके उद्घाटन में आमंत्रण को अस्वीकार करने का भी काम किया और इसे उचित भी ठहराया।

अब वे ऐसा दिखा रहे हैं कि चढ़ावा चोरी की घटना से सबसे अधिक दुखी वही हैं। इसके लिए उन्होंने जो स्वांग किया, वह एक तरह से भगवा भेष धारण करने वालों को अपमानित करने वाला ही है। यह ध्यान रहे कि चढ़ावा चोरी में किसी संत का नाम नहीं आया है। दान हड़पने के मामले में जो लोग गिरफ्तार किए गए हैं और जिन पर अपनी जिम्मेदारी का सही तरीके से निर्वाह न करने के आरोप लगे हैं, उनमें से कोई भी साधु नहीं है। इसके बाद भी संसद परिसर में सांसद पप्पू यादव साधु भेष में दान मांगते दिखे। उन्हें दान देने का नाटक राहुल गांधी समेत अन्य अनेक सांसदों ने किया। इनमें मुख्यतः सपा सांसदों की भागीदारी रही। इसके बाद पप्पू यादव दान पात्र लेकर भागते दिखे।

एक गंभीर मामले को फूहड़ तरीके से उठाना यही दिखाता है कि राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर विपक्ष का एकमात्र उद्देश्य तंज कसना और तमाशा खड़ा करना है। इस कोशिश में वह यह देखने को भी तैयार नहीं कि आखिर संत समाज और भगवा को अपमानित करके उसे क्या हासिल होने वाला है? ऐसा काम वही कर सकता है, जो चढ़ावा चोरी के मामले से सही तरह परिचित न हो या फिर जिसका उद्देश्य नारेबाजी की राजनीति करना अथवा संत समाज को अपमानित करना हो।

इससे बड़ी विडंबना और कोई नहीं कि साधु बनने का स्वांग उन पप्पू यादव ने रचा, जो केवल दागी छवि वाले सांसद ही नहीं हैं, बल्कि उन पर हत्या के प्रयास, अवैध कब्जे करने, रंगदारी मांगने समेत करीब 40 मामले दर्ज हैं। इन मामलों का उल्लेख स्वयं उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में अपने शपथपत्र में किया था।

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में विपक्ष ने केंद्र सरकार और विशेष रूप से गृहमंत्री अमित शाह को भी कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की। आखिर उनका इस मामले से क्या लेना-देना? क्या वे देश में हर कहीं चोरी-गबन के लिए जिम्मेदार होंगे? स्पष्ट है कि विपक्ष चढ़ावा चोरी प्रकरण का इस्तेमाल केवल राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए कर रहा है। इसमें कोई रोक नहीं, लेकिन किसी मुद्दे को भोंडे ढंग से उठाना ऐसा करने वाले की नीयत पर सवाल उठाता है।