प्रधानमंत्री ने नशे की लत की समस्या से निपटने के लिए 'विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान' की जो शुरुआत की, वह समय की मांग है। इस अभियान को देश भर में जनभागीदारी आंदोलन के रूप में शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य देश के युवाओं को नशे की लत के खिलाफ एक साथ मिलकर प्रयत्न करने के लिए एकजुट करना है। इस अभियान का उद्देश्य केवल युवाओं को नशा मुक्त भारत के अभियान में योगदान के लिए प्रोत्साहित करना ही नहीं, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्य को समर्थन देना भी है।

निश्चित रूप से यह एक महत्वाकांक्षी अभियान है। जब देश विकसित भारत के सपने को साकार करने की ओर आगे बढ़ रहा है, तब यह आवश्यक ही नहीं अनिवार्य है कि देश के युवा मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहें और किसी भी तरह के नशे के शिकार न होने पाएं। इस अभियान को वास्तव में जन आंदोलन बनाने के लिए सरकार को बहुत कुछ करना होगा, क्योंकि आम तौर पर यह देखा जाता है कि सरकारी आयोजनों एवं अभियानों में स्वेच्छा से जनभागीदारी नहीं हो पाती।

एक समस्या यह भी है कि आमतौर पर ऐसे अभियानों से अन्य राजनीतिक दल और विशेष रूप से विरोधी राजनीतिक दल जुड़ना पसंद नहीं करते। सरकार को यह देखना चाहिए कि इस अभियान में सभी राजनीतिक दलों का सहयोग कैसे प्राप्त हो?

इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि युवाओं में नशे की बढ़ती लत किसी एक राज्य या क्षेत्र विशेष की समस्या नहीं है। यह एक तरह से पूरे देश की समस्या है, लेकिन इसी के साथ तथ्य यह भी है कि कुछ सीमावर्ती राज्य इस समस्या से कहीं अधिक ग्रस्त हैं। उदाहरणस्वरूप पंजाब एक अर्से से नशे की समस्या से गंभीर रूप से ग्रस्त है। एक के बाद एक राज्य सरकारों ने पंजाब को नशा मुक्त करने के लिए अभियान छेड़ा, लेकिन उन्हें वांछित सफलता नहीं मिल सकी।

पंजाब जैसी स्थिति पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों की भी है। इसका कारण यह है कि जहां पंजाब में पाकिस्तान मादक पदार्थ भेजने में लगा हुआ है, वहीं पूर्वोत्तर में यह काम म्यांमार से हो रहा है। यह एक चिंताजनक तथ्य है कि पिछले कुछ वर्षों में सीमा पार से नशे की आवक बढ़ी है। इसके अतिरिक्त देश में भी चोरी-छिपे मादक पदार्थ बनाने वालों की संख्या बढ़ती हुई दिख रही है।

युवाओं को नशे से बचाने के लिए केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारों और सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों को तो सक्रिय होना ही होगा, समाज को भी इस खतरे से सावधान रहना होगा। घर-परिवार और शिक्षा संस्थानों की ओर से छात्रों को इसके लिए सतत रूप से चेताया जाना चाहिए कि नशे की लत किस तरह युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर देती है। हर स्तर पर सक्रियता और जागरूकता से ही नशे की समस्या से निपटा जा सकता है।