विचार: मुश्किलों के बीच निर्यात बढ़ाने की चुनौती
भारत निर्यात के नए बाजारों और निर्यात की विविधता से इस वर्ष निर्यात के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करते हुए वर्ष 2030 तक एक लाख करोड़ डालर वस्तु निर्यात और एक लाख करोड़ डालर सेवा निर्यात का लक्ष्य प्राप्त करने की राह पर आगे बढ़ते हुए दिखाई देगा।
HighLights
भारत का लक्ष्य FY26-27 में $1 ट्रिलियन निर्यात प्राप्त करना।
मुक्त व्यापार समझौते और नए श्रम कानून निर्यात बढ़ाएंगे।
निर्यात बढ़ाने हेतु नए बाजारों और विविधीकरण पर जोर।
डॉ. जयंतीलाल भंडारी। इस समय जब वैश्विक निर्यात की वृद्धि दर में कमी आती दिख रही है, तब भारत निर्यात बढ़ाने के साथ इस वर्ष निर्यात के ऊंचे लक्ष्य को प्राप्त करने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बोर्ड आफ ट्रेड की बैठक में सभी राज्यों के औद्योगिक संगठनों से कहा कि सरकार द्वारा निर्यात की राह को आसान बनाया जा रहा है और भारत विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल एक लाख करोड़ डालर के निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। चालू वित्त वर्ष में वस्तु निर्यात का लक्ष्य लगभग 530 अरब डालर (16-17 प्रतिशत वृद्धि) और सेवा निर्यात का लक्ष्य लगभग 470 अरब डालर (11-12 प्रतिशत वृद्धि) अनुमानित है।
पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात 863 अरब डालर था। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में वस्तु निर्यात में 15 प्रतिशत और सेवा निर्यात में 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस समय सरकार निर्यात बढ़ाने की रणनीति के तहत निर्यातकों को विभिन्न लाभ दे रही है। सरकार छोटे उद्योगों के अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन का खर्च 'निर्यात संवर्धन मिशन' के तहत उठाएगी। उसने सतत टेक्सटाइल, टेक्निकल टेक्सटाइल, परफार्मेंस टेक्सटाइल और मेडिकल टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में उभरते अवसरों को भी चिह्नित किया है। जिन क्षेत्रों में भारत पहले से ही उल्लेखनीय रूप से निर्यात कर रहा है सरकार की नई रणनीति उन क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने, तरजीह मिले हुए सेक्टर में निर्यात के विविधीकरण करने, गैर शुल्क बाधाएं कम करने तथा आपूर्ति से जुड़ी कमियों को दूर करने पर केंद्रित है।
यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, ओमान, मारीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), आस्ट्रेलिया आदि देशों के साथ भारत के तेजी से बढ़ते द्विपक्षीय व्यापार समझौतों और मुक्त व्यापार समझौतों को हाल में पूरे देश में लागू की गईं चार नई श्रम संहिताएं अधिक लाभप्रद बना सकती हैं। नए श्रम कानूनों से सेवा निर्यात में भी वृद्धि होते हुए दिखाई देगी। यह बात अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की नवीनतम सेवा निर्यात से संबंधित अध्ययन रिपोर्ट में भी रेखांकित हो रही है। इसमें कहा गया है कि हाल के दशकों में भारत से सेवाओं का निर्यात वस्तुओं की तुलना में कहीं तेजी से बढ़ा है। ये ऐसी सेवाएं हैं, जिन्हें बिना भौतिक निकटता के सीमाओं के पार पहुंचाना आसान है। साथ ही डिजिटल प्लेटफार्म, क्लाउड कंप्यूटिंग और रिमोट वर्क ने कई सेवाओं को व्यापार योग्य बना दिया है। जैसे-जैसे दूरी का महत्व कम होता जा रहा है और डिजिटल व्यापार बढ़ रहा है, वैसे-वैसे भारत से सेवाओं का निर्यात बढ़ रहा है। वैश्विक सेवाओं के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी वर्ष 2004-05 में 1.9 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2025-26 में करीब 4.3 प्रतिशत हो गई।
इस समय दुनिया के विकसित और विकासशील देश भारत के साथ कारोबार बढ़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में भारत को निर्यात बढ़ाने के लिए निर्यात के नए बाजार और निर्यात विविधता की रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा। विशेष रूप से चिह्नित किए गए नए देशों के निर्यात बाजारों में अपनी निर्यात पैठ बनाने के हरसंभव उपाय करने होंगे। वर्तमान में भारत से कुल निर्यात का अधिकांश भाग अमेरिका, यूएई, ब्रिटेन, सऊदी अरब और चीन जैसे कुछ प्रमुख देशों पर निर्भर है। अब ऐसे देशों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है, ताकि किसी एक या कुछ देशों में आर्थिक सुस्ती का सीधा असर भारत पर न पड़े। अब पारंपरिक बाजारों के अलावा उत्तर-पूर्व एशिया और पूर्वी अफ्रीका जैसे नए उभरते क्षेत्रों तक निर्यात पहुंच बढ़ानी होगी।
निर्यात विविधीकरण पर भी ध्यान देना होगा। हमें निर्यात बढ़ाने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण के साथ कई बातों पर ध्यान देना होगा। अल्पकालिक वृद्धि के पीछे भागने के बजाय भारत को मध्यम अवधि की राजकोषीय और बाह्य स्थिरता को सुरक्षित रखना होगा। लंबे समय से लंबित सुधारों को आगे बढ़ाना होगा। एआई जैसे उच्चस्तरीय क्षेत्रों में निवेश, मजबूत डिजिटल ढांचा और नियामकीय बाधाओं को बहुपक्षीय प्रयासों के माध्यम से आसान बनाना होगा, जो सीमाओं के पार सेवा निर्यात को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकें। निर्यातकों की दिक्कतों को कम करना होगा। ये दिक्कतें केवल शुल्क वृद्धि तक सीमित नहीं हैं, वरन निर्यात पर लगाए गए एंटी-डंपिंग शुल्क से भी संबंधित हैं। भारत द्वारा विभिन्न देशों के साथ एफटीए के अधिकतम लाभ उठाने के लिए घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, एफटीए के लिए जागरूकता बढ़ाने और गैर-टैरिफ बाधाएं दूर करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
उम्मीद करें कि विभिन्न देशों के साथ भारत के एफटीए और द्विपक्षीय व्यापार समझौते शीघ्रतापूर्वक आकार लेते हुए दिखाई देंगे। भारत निर्यात के नए बाजारों और निर्यात की विविधता से इस वर्ष निर्यात के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करते हुए वर्ष 2030 तक एक लाख करोड़ डालर वस्तु निर्यात और एक लाख करोड़ डालर सेवा निर्यात का लक्ष्य प्राप्त करने की राह पर आगे बढ़ते हुए दिखाई देगा।
(लेखक अर्थशास्त्री हैं)












