यह अच्छा हुआ कि अंततः सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि ई-20 ईंधन अर्थात एथनाल मिश्रित पेट्रोल से गाड़ियों का माइलेज भले ही कुछ कम होता हो, लेकिन यह ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ पर्यावरण के लिए उपयोगी होने के साथ ही किसानों के लिए भी लाभकारी है। इसके अतिरिक्त यह विदेशी मुद्रा की बचत में भी सहायक है।

और भी अच्छा होता कि यह स्पष्टीकरण पहले ही आ जाता, क्योंकि एक अर्से से इस तरह की अपुष्ट खबरें डिजिटल मीडिया में तैर रही थीं कि 20 प्रतिशत एथनाल वाले पेट्रोल से माइलेज में अच्छी-खासी कमी आने के साथ ही वाहन के इंजन को भी नुकसान पहुंचता है। कुछ लोगों ने तो ऐसे फर्जी वीडियो शेयर किए कि ई-20 पेट्रोल से उनकी गाड़ी बीच रास्ते में बंद हो गई।

इस दुष्प्रचार को देखते हुए सरकार और विशेष रूप से पेट्रोलियम मंत्रालय को समय रहते सक्रिय होना चाहिए था और वस्तुस्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी। देर से ही सही, यह काम किया गया, लेकिन अभी इस बारे में स्पष्टता की अपेक्षा है कि क्या पांच-छह साल पुरानी गाड़ियों के लिए भी ई-20 पेट्रोल उपयुक्त है? उचित यह होगा कि इस तरह का कोई स्पष्टीकरण देने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ ही आटो कंपनियां भी आगे आएं।

यह ठीक है कि कुछ कार कंपनियों के अधिकारियों ने लोगों को आश्वस्त किया है, लेकिन बेहतर होता कि इस मामले में आटो कंपनियों के संगठन सोसाइटी आफ इंडियन आटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स की ओर से भी अपनी बात कही जाती। वैसे भी इस संगठन का मुख्य कार्य सरकार के साथ मिलकर आटो सेक्टर की नीतियों, सुरक्षा मानकों और उत्सर्जन संबंधी नियमों को तय करना है।

ई-20 मामले से सरकार को यह सीख लेनी चाहिए कि कोई नई पहल करने के साथ ही हितधारकों को भरोसे में लेना और आम लोगों को उसके उद्देश्यों से परिचित कराना आवश्यक होता है। यह मानने के अच्छे-भले कारण हैं कि एक एजेंडे के तहत किसी लाबी की ओर से ई-20 ईंधन के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाया गया। नीति-नियंताओं को ऐसे एजेंडाधारियों के प्रति सदैव सतर्क रहना चाहिए।

यदि यह पहले दिन से ही स्पष्ट होता कि ई-20 ईंधन से माइलेज में महज 3-4 प्रतिशत की कमी आती है और इसके इस्तेमाल से इंजन पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता तो शायद एथनाल मिश्रित पेट्रोल के खिलाफ दुष्प्रचार करने वालों को सक्रिय होने का अवसर ही नहीं मिलता। आखिर इसके पहले ई-10 पेट्रोल का उपयोग हो ही रहा था और उसे लेकर कोई शिकायत भी नहीं थी।

इस तथ्य की भी अनदेखी न की जाए कि विश्व के कई देशों में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनाल मिलाया जाता है। ब्राजील तो बायोफ्यूल के मामले में वैश्विक लीडर है। यहां सामान्य पेट्रोल में 27 से 30 प्रतिशत तक एथनाल मिलाया जाता है।