गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने के लिए एक अभियान शुरू करने की दिशा में सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और केंद्रीय एजेंसियों के प्रमुखों की जो बैठक बुलाई, उससे यही पता चलता है कि वे इस अभियान को लेकर संकल्पबद्ध हैं। वास्तव में ऐसे किसी अभियान की गहन आवश्यकता है। ऐसा कोई अभियान तभी सफल होगा जब उसे पूरे देश में एक साथ शुरू किया जाएगा। यह अच्छी बात है कि पहली बार ऐसा होने जा रहा है।

अभी तक अलग-अलग राज्यों की पुलिस की ओर से अपने-अपने स्तर पर घुसपैठियों के खिलाफ अभियान छेड़ा जाता था। ऐसे किसी अभियान के दौरान उनकी पहचान और पकड़ भी होती थी, लेकिन घुसपैठिए ऐसा कोई अभियान शुरू होते ही पड़ोसी राज्यों में चले जाते थे। इन स्थितियों में यह आवश्यक है कि पूरे देश में घुसपैठियों के खिलाफ एक साथ अभियान चलाया जाए।

देश में घुसपैठियों और विशेष रूप से बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या कितनी होगी, इसका ठीक-ठीक अनुमान लगाना कठिन है, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि उनकी अच्छी-खासी संख्या है। बांग्लादेशी घुसपैठिए एवं रोहिंग्या देश के लगभग सभी हिस्सों में दिखाई देते हैं। कई शहरों में तो वे लंबे समय से रह रहे हैं और उन्होंने छल-छद्म से तरह-तरह के पहचान पत्र भी हासिल कर लिए हैं। पूर्वोत्तर और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में तो वे मतदाता भी बन गए हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ भी उठा रहे हैं।

घुसपैठ की समस्या पुरानी है, लेकिन अभी तक किसी भी केंद्रीय सत्ता ने इससे निपटने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए। इसका परिणाम यह हुआ कि घुसपैठ लगातार जारी है। यह मानने के अच्छे भले कारण हैं कि घुसपैठियों को अवैध तरीके से देश में लाने और उन्हें पहचान पत्र देकर देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाने-बसाने वाले गिरोह सक्रिय हैं। इन स्थितियों में घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें पकड़कर वापस भेजने के लिए एक सुनियोजित रणनीति बनानी होगी।

इस रणनीति में सभी राज्य सरकारों को सक्रिय रूप से सहयोग देना होगा। घुसपैठियों के खिलाफ सख्ती इसलिए आवश्यक है, क्योंकि वे केवल देश के संसाधनों पर ही बोझ नहीं बन रहे हैं, बल्कि देश के अनेक सीमावर्ती क्षेत्रों में सामाजिक ताने-बाने को भी बदल रहे हैं। कई जगह तो उनकी गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने का काम कर रही हैं।

आवश्यक केवल यह नहीं है कि घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजा जाए, बल्कि यह भी है कि सीमाओं पर ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे भविष्य में देश के किसी भी हिस्से में घुसपैठ न हो सके। इसके लिए सीमाओं को अभेद्य बनाने का जो कार्य जारी है, उसे और ठोस रूप प्रदान करना होगा।