डिजिटल मीडिया कंपनियों मेटा और गूगल की ओर से जिस तरह यह कहा गया कि उनके लिए विवादित सामग्री की निगरानी करना संभव नहीं, वह एक तरह से जवाबदेही से बचने का बहाना ही है। यह पहली बार नहीं है, जब स्वयं को सोशल मीडिया कहने वाली कंपनियों ने फर्जी, भ्रमित करने, अफवाह, उत्तेजना और वैमनस्य फैलाने वाली खबरों की निगरानी करने के मामले में अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की हो। वे ऐसी कोशिश लगातार करती चली आ रही हैं।

यही कारण है कि दुनिया भर के अनेक देशों को उन्हें जवाबदेह बनाने के लिए तरह-तरह के कदम उठाने पड़ रहे हैं। इस निष्कर्ष पर पहुंचने के पर्याप्त कारण हैं कि येन-केन-प्रकारेण अधिक से अधिक लोगों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने और पैसा कमाने के लिए डिजिटल मीडिया माध्यम ऐसे तौर-तरीके अपना रहे हैं, जिसके चलते वे बेलगाम हो रहे हैं। समस्या केवल यह नहीं है कि डिजिटल मीडिया कंपनियां नियंत्रण से बाहर हो रही हैं, बल्कि यह भी है कि वे लोगों को लती बनाने के साथ उन्हें और विशेष रूप से बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रही हैं।

यही कारण है कि एक के बाद एक देश ऐसे कानून बनाने को बाध्य हो रहे हैं जिससे किशोरवय के लोग उनका उपयोग न कर सकें। चिंता की बात यह भी है कि डिजिटल मीडिया कंपनियां अश्लील एवं आपत्तिजनक सामग्री को बढ़ावा देने में लगी हुई हैं। अभी पिछले दिनों ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इंस्टाग्राम के स्वामित्व वाली कंपनी मेटा को ऐसे सभी विज्ञापन एवं अन्य सामग्री हटाने का आदेश दिया था, जो यौन शोषण को बढ़ावा देती है। इसी तरह कुछ दिन पहले टेलीग्राम को इसके लिए नोटिस दिया गया कि वह अपने प्लेटफार्म से पायरेटेड फिल्मों और ओटीटी कंटेंट के प्रसार को रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से कदम उठाए।

टेलीग्राम लंबे समय से पायरेसी को बढ़ावा देने में लगा हुआ है। यह वही इंटरनेट प्लेटफार्म है जिस पर कुछ दिनों पहले इसलिए अस्थायी रूप से प्रतिबंध लगाना पड़ा था, क्योंकि उससे मेडिकल प्रवेश परीक्षा-नीट के प्रश्नपत्र लीक होने का खतरा पैदा हो गया था। इस तथ्य की भी अनदेखी नहीं की जा सकती कि अपराधी एवं आतंकी तत्व भी डिजिटल प्लेटफार्म का इस्तेमाल करने में लगे हुए हैं। भले ही डिजिटल मीडिया कंपनियां यह दावा करती रहती हों कि वे नकारात्मक एवं आपत्तिजनक सामग्री की छानबीन करने और उन पर रोक लगाने के लिए सचेत हैं, लेकिन वस्तुस्थिति इससे विपरीत है। इन स्थितियों में यह आवश्यक हो जाता है कि डिजिटल मीडिया कंपनियों को जबाबदेह बनाने के लिए हरसंभव उपाय किए जाएं। उन्हें जवाबदेही के दायरे में लाना ही होगा, क्योंकि अब वे एआइ का भी बेजा इस्तेमाल कर रही हैं।