जागरण संपादकीय: नागरिकता का प्रमाण
विदेश मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण न मानने पर बहस छिड़ गई है।
HighLights
विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट को यात्रा दस्तावेज बताया, नागरिकता का नहीं।
आधार, पैन जैसे दस्तावेज भी नागरिकता का प्रमाण नहीं माने जाते।
एनआरसी और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करना आवश्यक है।
विदेश मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण ने कि पासपोर्ट यात्रा का दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण नहीं, एक बहस को जन्म दे दिया है तो इसीलिए, क्योंकि आम धारणा यही थी कि पासपोर्ट नागरिकता का सबसे पुष्ट प्रमाण होता है। यह आम धारणा इसके बाद भी थी कि पासपोर्ट एक्ट ऐसा नहीं कहता। इस एक्ट के अनुसार विशेष परिस्थितियों में गैर-भारतीयों को भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है। उच्च न्यायालयों ने भी यही निर्णय दिया है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है।
विदेश मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद इस पर बहस होना स्वाभाविक है कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है तो फिर क्या है? यह प्रश्न इसलिए भी सतह पर है, क्योंकि हाल में और विशेष रूप से कुछ राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआइआर के वक्त यह कहा गया कि आधार भी नागरिकता का प्रमाण नहीं है। इसी तरह पैन, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड इत्यादि भी नागरिकता के प्रमाण पत्र नहीं माने गए। यह सही है कि नागरिकता का निर्धारण सिटिजनशिप एक्ट के तहत होता है, लेकिन समस्या यह है कि देश के लोगों को किसी तरह का नागरिकता प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाता।
सिटिजनशिप एक्ट यह तो बताता है कि जन्म, वंश, देश में लंबी अवधि तक रहने और कुछ अन्य आधारों पर नागरिकता तय होती है, लेकिन अपने देश में अन्य देशों की तरह नागरिकता का कोई विशिष्ट प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाता। विश्व के विकसित और यहां तक कि कई विकासशील देशों में यह काम किया जाता है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि इन देशों के लोगों को अपनी नागरिकता सिद्ध करने के लिए तरह-तरह के दस्तावेजों का सहारा नहीं लेना पड़ता। चूंकि सिटिजनशिप एक्ट इसकी सिफारिश करता है कि भारत सरकार प्रत्येक नागरिक का अनिवार्य पंजीकरण कर सकती है, राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी कर सकती है और अपने नागरिकों का रजिस्टर यानी एनआरसी तैयार कर सकती है, इसलिए यह काम किया ही जाना चाहिए।
हालांकि अतीत में नागरिकता प्रमाण पत्र के लिए एनआरसी लाने और आधार को एनआरसी से जोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ हो नहीं सका। इसके बाद नागरिकता कानून में संशोधन करने यानी सीएए बनाने के बाद एनआरसी की आवश्यकता जताई गई, लेकिन उसके खिलाफ दुष्प्रचार के तहत एक अभियान छेड़ दिया गया। इससे राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर तैयार करने की पहल ठंडे बस्ते में चली गई। अभी तक केवल असम में नागरिक रजिस्टर तैयार किया जा सका है। उचित यह होगा कि शेष देश में भी ऐसा ही किया जाए और एनआरसी तैयार कर लोगों को नागरिकता प्रमाण पत्र दिए जाएं। यह पहल घुसपैठियों की पहचान करने के साथ कई अन्य समस्याओं का भी समाधान करेगी।












