जागरण संपादकीय: सड़क सुरक्षा बोर्ड
खराब सड़कें, खटारा वाहन, अकुशल चालक, यातायात नियमों की अनदेखी आदि सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं।
HighLights
सात साल की देरी से हुआ राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड का गठन।
बोर्ड सड़क सुरक्षा मानक और यातायात प्रबंधन पर देगा सलाह।
भारत में बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं।
किस तरह कुछ आवश्यक मामलों में भी समय पर कदम उठाने से बचा जाता है, इसका ही उदाहरण है लंबी देरी के बाद राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी होना। इससे खराब बात और कोई नहीं हो सकती कि सात वर्ष की प्रतीक्षा के बाद इस बोर्ड का गठन किया जा सका और वह भी तब, जब सुप्रीम कोर्ट ने इस बोर्ड के गठन में देरी को लेकर अप्रसन्नता व्यक्त की। कायदे से इस बोर्ड का गठन 2019 में तभी कर दिया जाना चाहिए था, जब मोटर यान अधिनियम में संशोधन कर इसके लिए प्रविधान किए गए थे। इस बोर्ड के गठन में देरी यही बताती है कि हमारे नीति-नियंता सड़क दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने के मामले में संवेदनशील नहीं।
इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि आखिरकार इस 20 सदस्यीय बोर्ड का गठन कर दिया गया, क्योंकि बात तब बनेगी, जब यह बोर्ड प्रभावी परिणाम देने में समर्थ भी होगा। इस बोर्ड के सदस्यों में सड़क इंजीनियरिंग और यातायात प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। इसमें विभिन्न राज्यों के परिवहन आयुक्त और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी भी होंगे।
यह बोर्ड केंद्र और राज्य सरकारों के साथ स्थानीय निकायों को यातायात प्रबंधन संबंधी तकनीकी सलाह और सहायता देने के साथ राष्ट्रीय राजमार्गों के सुरक्षित डिजाइन, निर्माण, रखरखाव आदि के न्यूनतम सुरक्षा मानक भी निर्धारित करेगा। इसके अतिरिक्त यह बोर्ड सड़क दुर्घटना के पीड़ितों की मदद करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करने वाली नीतियां बनाने के भी सुझाव देगा।
समझना कठिन है कि बेलगाम मार्ग दुर्घटनाओं के बाद भी सड़क सुरक्षा बोर्ड के गठन में देरी क्यों हुई? यह काम तो बहुत पहले हो जाना चाहिए था, क्योंकि देश में वर्ष दर वर्ष मार्ग दुर्घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इन दुर्घटनाओं में मरने और घायल होने वालों की संख्या विश्व में सबसे अधिक है। मार्ग दुर्घटनाओं के मामले में भारत का रिकार्ड बेहद खराब ही नहीं, बल्कि शर्मनाक भी है, क्योंकि देश में वाहनों की संख्या कई देशों से कम हैं। मार्ग दुर्घटनाओं के कारण किसी से छिपे नहीं।
खराब सड़कें, खटारा वाहन, अकुशल चालक, यातायात नियमों की अनदेखी आदि सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं। क्या राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड ऐसे उपाय कर सकेगा, जिनसे इन कारणों का निवारण हो सके? यह प्रश्न इसलिए, क्योंकि जब तक मार्ग दुर्घटनाओं के जाने-पहचाने कारणों का निवारण करने में लापरवाही का परिचय देने वाले अधिकारियों और विभागों को जवाबदेह नहीं बनाया जाएगा, तब तक हालात बदलने वाले नहीं हैं। इसलिए और नहीं, क्योंकि सुरक्षित यातायात के लिए जैसी राजनीतिक एवं प्रशासनिक इच्छाशक्ति चाहिए, उसका अभाव ही अधिक दिखता है।












